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ट्रंप के निशाने पर फिर ईरान? नेतन्याहू ने बनाया हमले का दबाव; मिडटर्म चुनाव के बाद शुरू हो सकता है नया युद्ध

 Written By: Malaika Imam
 Published : Nov 03, 2026 06:56 am IST,  Updated : Nov 03, 2026 07:05 am IST

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर से हमला हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सैन्य कार्रवाई के लिए दबाव बना रहे हैं।

बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप- India TV Hindi
बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप Image Source : FILE (AP)

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ एक बार फिर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बना रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हवाई हमलों की नई कार्रवाई शुरू की जाए। रिपोर्ट में क्षेत्रीय अधिकारियों और मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों के हवाले से यह दावा किया गया है। हालांकि, ट्रंप ने अभी तक ईरान पर नए हमले को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू और उनके दक्षिणपंथी सहयोगियों को पिछले सप्ताह हुए चुनाव में संसद में बहुमत का नुकसान हुआ है। ऐसे में ईरान के साथ दोबारा बड़े स्तर पर युद्ध शुरू होने से नेतन्याहू को राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक समर्थन मिल सकता है। इससे उन्हें आपातकालीन सरकार बनाने का मौका भी मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू ने सप्ताहांत में ट्रंप से फोन पर बातचीत के दौरान ईरान पर नए हमलों की पैरवी की थी। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी इस दिशा में काम किया है। हालांकि, ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी सहमति नहीं दी।

कतर की मध्यस्थता से अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत

एक तरफ इजरायल सैन्य कार्रवाई के लिए दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कतर के मध्यस्थों ने पिछले सप्ताह ईरानी अधिकारियों के साथ दो दौर की बातचीत की। इस बातचीत का उद्देश्य एक ऐसा समझौता तैयार करना है, जिसके तहत ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हमले बंद करे और बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाए। इस सप्ताह भी बातचीत के नए दौर होने की संभावना है।

ट्रंप बोले- कूटनीति से समाधान चाहते हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि नेतन्याहू के साथ उनकी बातचीत काफी अच्छी रही। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच ईरान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, लेकिन बातचीत का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को कहा कि ट्रंप अभी किसी अंतिम फैसले पर नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर ट्रंप सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता और इच्छाशक्ति भी रखते हैं।

अरब देशों को बड़े क्षेत्रीय युद्ध का डर

मध्य पूर्व के कई अमेरिकी सहयोगी देश ईरान पर नए हमलों के खिलाफ हैं। उन्हें आशंका है कि इससे पूरा क्षेत्र अस्थिर हो सकता है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, नए हमलों की स्थिति में यमन के हूती विद्रोही सऊदी अरब और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले तेज कर सकते हैं। इराक में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र गुट भी संघर्ष में शामिल हो सकते हैं। बहरीन में आयोजित मनामा डायलॉग सुरक्षा सम्मेलन में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गर्गाश ने चेतावनी दी कि अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद दूर नहीं हुए तो हालात बेहद खराब हो सकते हैं। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअत्ती ने भी कहा कि अगला सैन्य टकराव पहले से ज्यादा खतरनाक और विनाशकारी हो सकता है।

ईरान ने कहा- युद्ध और बातचीत दोनों के लिए तैयार

ईरान ने साफ किया है कि वह अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी सैन्य खतरे का जवाब देने में भी पीछे नहीं हटेगा। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि अमेरिका या इजरायल की ओर से किसी भी तरह के खतरे का तत्काल जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने संभावित लक्ष्यों की सूची बढ़ाने की भी बात कही।

ईरान चाहता है कि किसी भी समझौते में अमेरिका की ओर से उसके प्रावधानों को लागू करने की ठोस गारंटी दी जाए। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल पहले भी परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के दौरान ईरान पर हमले कर चुके हैं।

चीन भी कूटनीतिक पहल में जुटा

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच चीन ने भी कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग के मुताबिक, नवंबर के पहले या दूसरे पखवाड़े में चीन का एक विशेष दूत ईरान, ओमान और सऊदी अरब का दौरा करेगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी कहा है कि फारस की खाड़ी का क्षेत्र बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक संघर्ष का मैदान नहीं बनना चाहिए।

फिलहाल मध्य पूर्व में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर इजरायल अमेरिका से सैन्य कार्रवाई की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर कतर समेत कई देश बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश में जुटे हैं। अब सबकी नजर ट्रंप के फैसले और अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत पर टिकी है।

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